लेखक के बारेमें

डॉ. संजय पंडया एमडी डीएनबी (नेफ्रोलॉजी)

डॉ. संजय पंडया ने अपनी एम.ड़ी. मेडिसीन की उपाधि सन १९८६ में एम. पी. शाह मेडिकल कालेज, जामनगर से प्राप्त की|

तत्पचात् डॉ. पंडया ने किडनी से संबधित सुपरस्पेश्यालिटी डिग्री सन १९८९ में अहमदाबाद के किडनी इंस्टिटूट (IKDRC) में डॉ. एच. एल. त्रिवेदी के मार्गदर्शन में प्राप्त की|

डॉ. पंडया पिछले २० सालो से गुजरात के राजकोट में जाने माने किडनी रोग विशेषग्न - नेफ्रोलोजिस्ट के रूप में सेवाये प्रदान कर रह है| आप कुशल नेफ्रोलोंजिस्ट तो है ही साथ ही एक समर्पित अध्यापक और प्रतिष्ठित लेखक भी है|

आपने प्रेक्टिकल गाईडलाइस ऑन फ्लुइड थेरेपी (Practical Guidelines on Fluid Therapy) नामक पुस्तक डाक्टरों के लिए लिखी है| भारत में इस विषय की यह प्रथम पुस्तक होने के कारण इस पुस्तक को देश में विशेष ख्याति मिली है| भारत के प्रतिष्ठित मेडिकल कालेजोमे आपके फ्लुइड थेरेपी के विषय के प्रवचनों को अत्यंत प्रशंसा एवं प्रतिष्ठा प्राप्त हुई है|

किडनी के रोगो की रोकथाम एवं चिकित्सा के बारे में लोगों तक जानकारिया पहुँचाने के शुभ उदेषस्य से आपने प्रादेशिक भाषा गुजराती में "तमारी किडनी बचावो" (તમારી કિડની બચાવો) पुस्तक लिखी|

गुजराती पुस्तक की प्रशंसा एवं उपयोगिता से प्रेरित होकर आपने देश के विशाल हिन्दीभाषी पाठकों एवं किडनी के मरीजों की सेवा के लिए यह पुस्तक "सुरक्षा किडनी की" शीर्षक के साथ हिन्दी भाषा में प्रकाशित कर जनसेवा का उत्तम उदाहरण प्रस्तुत किया है|

डॉ. शुभा दुबे (एम. डी., डी. एम., डी. एन. बी. नेफ्रोलॉजी)

डॉ. शुभा दुबे अविभाजित मध्यप्रदेश एवं वर्तमान में छत्तीसगढ़ की सर्वप्रथम किडनी रोग विशेषज्ञ हैं जिन्होंने महिला होकर भी देश की, किडनी के क्षेत्र में सर्वोच्च डिग्री हासिल की।

डॉ. शुभा दुबे ने मेडिसिन में एम. डी. की डिग्री गवर्नमेन्ट मेडिकल कॉलेज, नागपुर से 1985 में प्राप्त के पश्चात अहमदाबाद (गुजरात) के ख्यातिप्राप्त किडनी इंस्टीट्यूट, आई. के. डी. आर. सी. से डी. एम. (नेफ्रोलॉजी) की एवं वेलोर मेडिकल कॉलेज से डी. एन. बी. (नेफ्रोलॉजी) की उपाधि प्राप्त की।

सन 1990 में उन्हें गवर्नमेन्ट मेडिकल कॉलेज जबलपुर में असिस्टेंट प्रोफेसर नियुक्त किया गया जहाँ उन्होंने डायालिसिस यूनिट की शुरूआत की। पारिवारिक कारणों एवं छत्तीसगढ़ से विशेष स्नेह के कारण 1991 में उन्होंने रायपुर में विधा हॉस्पिटल एण्ड किडनी सेंटर की स्थापना की एवं इस अंचल के मरीजों के लिए समस्त किडनी रोगों का उपचार एवं डायालिसिस की सुविधा प्रदान की। विगत 25 वर्षों में उन्होंने हजारों किडनी मरीजों की प्राण रक्षा की है।

डॉ. शुभा दुबे की विशेष रूचि उच्च रक्तचाप एवं मधुमेह से होने वाली किडनी की समस्याओं की रोकथाम व इस क्षेत्र में मरीजों को शिक्षित करने में है। आज वे संपूर्ण छत्तीसगढ़ में किडनी के क्षेत्र में एक विख्यात डॉक्टर के रूप में पहचानी जाती है। उनके सद्कार्यों के परिणाम स्वरूप उन्हें छत्तीसगढ़ चेम्बर्स ऑफ कामर्स द्वारा महिला शक्ति सम्मान प्रदत्त किया गया।

डॉ. शुभा दुबे इंडियन सोसाइटी ऑफ नेफ्रोलॉजी, इंडियन सोसाइटी ऑफ आर्गन ट्रान्सप्लान्टेशन एवं इंडियन सोसाइटी ऑफ पेरीटोनियल डायालिसिस की सक्रिय सदस्य हैं। ये महिला समाज के लिए एक प्रेरणास्त्रोत की तरह हैं जहाँ महिलायें सिर्फ परिवार के अंदर ही नहीं बल्कि चिकित्सा के क्षेत्र में किडनी जैसी जटिल विषय में भी अपना योगदान दे सकती हैं।

Indian Society of Nephrology
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kidneyindia
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