Prevention and Care of Common Kidney Diseases at Single Clickकिडनी फेल्योर के मरीजों की संख्या बहुत तेजी से बढ़ रही है! तो चलिये साथ मिलकर किडनी के रोगों की रोकथाम करें !

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१९. पथरी की बीमारी

Topics
  • पथरी की बीमारी
  • लक्षण
  • निदान
  • रोकथाम
  • उपचार

पथरी का रोग बहुत से मरीजों में दिखाए देनेवाला एक महत्वपूर्ण किडनी का रोग है। पथरी के कारण असहनीय पीड़ा, पेशाब में संक्रमण और किडनी को नुकसान हो सकता है। इसलिए पथरी के बारे में और उसे रोकने के उपायों को जानना जरुरी है।

पथरी क्या है?

पेशाब में कैल्शियम ऑक्जलेट या अन्य क्षारकणों (Crystals) का एक दूसरे से मिल जाने से कुछ समय बाद धीरे-धीरे मूत्रमार्ग में कठोर पदार्थ बनने लगता है, जिसे पथरी के नाम से जाना जाता है।

पथरी कितनी बड़ी होती है? देखने में कैसी लगती है? वह मूत्रमार्ग में कहाँ देखी जा सकती है?

मूत्रमार्ग में होनेवाली पथरी अलग-अलग लंबाई और विभिन्न आकर की होती है। यह रेत के कण जितनी छोटी या गेंद की तरह बड़ी भी हो सकती है। कुछ पथरी गोल या अंडाकार और बाहर से चिकनी होती है। इस प्रकार की पथरी से कम दर्द होता है और वह सरलता से प्राकृतिक रूप से पेशाब के साथ बाहर निकल जाती है।

कुछ पथरी खुरदरी होती है। जिससे बहुत ज्यादा दर्द होता है और वह सरलता से पेशाब के साथ बाहर नहीं निकलती है।

पथरी मुख्यतः किडनी, मूत्रवाहिनी और मूत्राशय में देखी जाती है।

कुछ व्यक्तियों में पथरी विशेष रूप से क्यों देखी जाती है? पथरी होने के मुख्य कारण क्या हैं?

ज्यादातर लोगों के पेशाब में मौजूद कुछ खास रसायनिक पदार्थ क्षार के कणों को एक दूसरे के साथ मिलने से रोकते हैं, जिससे पथरी नहीं बनती है।

मूत्रमार्ग की पथरी पेट में असहनीय दर्द का मुख्य कारण है।

परन्तु कई लोगों में निम्नलिखित कारणों से पथरी बनने की संभावना रहती है:

  1. कम पानी पीने की आदत
  2. वंशानुगत पथरी होने की तासीर
  3. बार-बार मूत्रमार्ग में संक्रमण होना
  4. मूत्रमार्ग में अवरोध होना
  5. विटामिन 'सी' या कैल्शियम वाली दवाओं का अधिक सेवन करना
  6. लम्बे समय तक शैयाग्रस्त रहना
  7. हाइपर पैराथायराइडिज्म की तकलीफ होना
पथरी के लक्षण:
  • सामान्यतः पथरी की बीमारी 30 से 40 साल की उम्र में और महिलाओं की तुलना में पुरुषों में तीन से चार गुना अधिक देखीजाती है।
  • कई बार पथरी का निदान अनायास ही हो जाता है। इन मरीजों में पथरी के होने का कोई लक्षण नहीं दिखता है। उसे "सालयेन्ट स्टोन" कहते हैं।
  • पीठ और पेट में लगातार दर्द होता है।
  • उलटी उबकाई आना।
  • पेशाब में जलन होना।
  • पेशाब में खून का जाना।
  • पेशाब में बार-बार संक्रमण का होना।
  • अचानक पेशाब का बंद हो जाना।
पेट में दर्द के साथ लाल पेशाब होने का मुख्य कारण पथरी है।
पथरी के दर्द के विशिष्ट लक्षण:
  • पथरी का दर्द पथरी के स्थान, आकर, प्रकार, एवं लंबाई- चौड़ाई पर आधारित होता है।
  • पथरी का दर्द अचानक शुरू होता है। इस दर्द में दिन में तारे दिखने लगते हैं अर्थात दर्द बहुत ही असहनीय होता है।
  • किडनी की पथरी का दर्द कमर से शुरू होकर आगे पेडू की तरफ आता है।
  • मूत्राशय की पथरी का दर्द पेडू और पेशाब की जगह में होता है।
  • यह दर्द चलने फिरने से अथवा उबड़-खाबड़ रस्ते पर वाहन में सफर करने पर झटके लगने से बढ़ जाता है।
  • यह दर्द साधारणतः घंटो तक रहता है। बा द में धीरे धीरे अपने आप कम हो जाता है।
  • ज्यादातर यह दर्द बहुत अधिक होने से मरीज को डॉक्टर के पास जाना पड़ता है, और दर्द कम करने के लिए दवा अथवा इंजेक्शन की जरूरत पडती है।
क्या पथरी के कारण किडनी खराब हो सकती है?
  • हाँ। कई मरीजों में पथरी गोल अण्डाकर और चिकनी होती है। प्रायः ऐसी पथरी के कोई लक्षण नहीं दिखाई देते है। ऐसी पथरी मूत्रमार्ग में अवरोध कर सकती है। जिसके कारण किडनी में बनता पेशाब सरलता से मूत्रमार्ग में नहीं जा सकता है और इसके कारण किडनी फूल जाती है।
  • यदि इस पथरी का समय पर उचित उपचार नहीं हो पाया तो लम्बे समय तक फूली हुई किडनी धीरे-धीरे कमजोर होने लगती है और बाद में काम करना संपूर्ण रूप से बंद कर देती है। इस तरह किडनी खराब होने के बाद पथरी निकाल भी दी जाए, तो फिर से किडनी के काम करने की संभावना बहुत कम रहती है।
बिना दर्द की पथरी के कारण किडनी खराब होने का भय अधिक रहता है।
मूत्रमार्ग की पथरी का निदान:
  • पथरी का निदान मुख्यतः मूत्रमार्ग की सोनोग्राफी और पेट के एक्सरे की मदद से किया जाता है।
  • आई. वी. पी. (Intra Venous Pyelography) की जाँच: साधारणतः यह जाँच निदान के लिए एवं ऑपरेशन अथवा दूरबीन द्वारा उपचार के पहले की जाती है।
  • इस जाँच द्वारा पथरी की लंबाई- चौड़ाई, आकर और स्थान की सही जानकारी तो मिलती ही है और साथ ही किडनी की कार्यक्षमता कितनी है और किडनी कितनी फूली हुई है, यह जानकारी भी मिल जाती है।
  • पेशाब और खून की जाँच के द्वारा पेशाब के संकमण एवं उसकी तीव्रता और किडनी की कार्यक्षमता के संबंध में जानकारी मिलती है।
मूत्रमार्ग की पथरी का उपचार:

पथरी के लिए कौन सा उपचार जरुरी है, यह पथरी की लंबाई, पथरी का स्थान, उसके कारण होनेवाली तकलीफ और खतरे को ध्यान में रखते हुए तय किया जाता है। इस उपचार को दो भागों में बाँटा जा सकता है:

(अ) दवा द्वारा उपचार (Conservative Medical Treatment)
(ब) मूत्रमार्ग से पथरी निकालने के विशिष्ट उपचार (ऑपरेशन, दूरबीन, लीथोट्रीप्सी वगैरह)

(अ) दवा द्वारा उपचार :

50 प्रतिशत से ज्यादा मरीजों में पथरी का आकर छोटा होता है, जो प्राकृतिक रूप से तीन से छः सप्ताह में अपने आप पेशाब के साथ निकल जाती है। इस दौरान मरीज को दर्द से राहत के लिए और पथरी को जल्दी निकलने में सहायता के लिए दवाई दी जाती है।

पथरी के निदान के लिए मुख्य जाँच सोनोग्राफी और एक्सरे है।
1. दवा और इंजेक्शन :

पथरी से होनेवाले असह्य दर्द को कम करने ले लिए तुरंत एवं दीर्घावधि तक असरकारक दर्दशामक गोली अथवा इंजेक्शन दिया जाता है।

2. ज्यादा पानी:

दर्द कम होने के मरीजों को ज्यादा मात्रा में पानी पीने की सलाह दी जाती है। ज्यादा प्रवाही लेने से पेशाब ज्यादा होता है और इससे पेशाब के साथ पथरी निकलने में सहायता मिलती है। यदि उलटी के कारण पानी पीना संभव नहीं हो, तो ऐसे मरीजों को नसों में बोतल द्वारा ग्लूकोज चढ़ाया जाता है।

3. पेशाब में संक्रमण का उपचार:

पथरी के कई मरीजों में पेशाब में संक्रमण दिखाई देता है, जिसका एन्टिबायोटिक्स द्वारा उपचार किया जाता है।

(ब) मूत्रमार्ग से पथरी निकालने के विशिष्ट उपचार :

यदि प्राकृतिक रूप से पथरी निकल न सके, तो पथरी को निकालने के लिए कई विकल्प हैं। पथरी का आकर, स्थान और प्रकार को ध्यान में रखकर कौन सी पध्दति उत्तम है यह यूरोलोजिस्ट या सर्जन तय करते हैं।

क्या प्रत्येक पथरी को तुरंत निकालना जरुरी है?

नहीं। यदि पथरी से बार-बार दर्द, पेशाब में संक्रमण, पेशाब में खून, मूत्रमार्ग में अवरोध अथवा किडनी खराब न हो रही हो, तो ऐसी पथरी को तुरंत निकालने की जरूरत नहीं होती है। डॉक्टर इस पथरी का सही तरह से ध्यान करते हुए उसे कब और किस प्रकार के उपचार से निकालना लाभदायक रहेगा, इसकी सलाह देते है। पथरी के कारण मूत्रमार्ग में अवरोध हो, पेशाब में बार-बार खून या मवाद आता हो या किडनी को नुकसान हो रहा हो, तो पथरी तुरंत निकालना जरुरी हो जाता है।

छोटी पथरी ज्यादा पानी लेने से प्राकृतिक रूप से अपने आप पेशाब में निकल जाती है।
1. लीथोट्रीप्सी (E.S.W.L.- Extra Corporeal Shock Wave Lithotripsy)

किडनी पर मूत्रवाहिनी के ऊपरी भाग में उपस्थित पथरी को निकालने की यह आधुनिक पध्दति है। इस पध्दति में खास प्रकार के लीथोट्रीप्टर मशीन की सहायता से उत्पन्न की गई शक्तिशाली तरंगों (Shock Waves) की सहायता से पथरी का रेत जैसा चूरा कर दिया जाता है, जो धीरे-धीरे कुछ दिनों में पेशाब के साथ बाहर निकल जाती है।

लाभ:
  • सामान्यत: रोगी को अस्पताल में भर्ती करने की आवश्यकता नहीं होता है।
  • ऑपरेशन एवं दूरबीन के प्रयोग के बिना एवं मरीज को बेहोश किए बगैर पथरी निकाली जाती है।
हानि:
  • सबी प्रकार की और बड़ी पथरी के लिए यह पध्दति प्रभावकारी नहीं है।
  • पथरी दूर करने के लिए कई बार एक से ज्यादा बार यह उपचार करना पडता है।
  • पथरी निकलने के साथ-साथ दर्द या कई बार पेशाब में संक्रमण भी हो सकता है।
  • बडी पथरी के उपचार में दूरबीन की मदद से किडनी और मूत्राशय के बीच विशेष प्रकार की नली (D.J.Stent) रखने की जरूरत पड़ती है।
2. किडनी की पथरी का दूरबीन द्वारा उपचार (PCNL - Per Cutaneous Nephro Lithotripsy)
  • किडनी की पथरी जब एक से. मी. से बड़ी हो, तब उसे निकालने की यह आधुनिक और असरकारक तकनीक है।
लीथोट्रीप्सी बिना ऑपरेशन के पथरी निकालने की आधुनिक और प्रभावकारी पध्दति है।
  • इस पध्दति में कमर पर किडनी के बगल में एक छोटा चीरा लगाया जाता है, जहाँ से किडनी तक का मार्ग बनाया जाता है। इस मार्ग से किडनी में जहाँ पथरी हो, वहाँ तक एक नली डाली जाती है।
  • इस नली से पथरी देखि जा सकती है। छोटी पथरी को फोरसेप्स (चिमटी) की मदद से और बड़ी पथरी को शक्तिशाली तरगों (Shock Waves) द्वारा चुरा करके बाहर निकाला जाता है।
लाभ :

सामान्यत: पेट चीरकर किए जानेवाले पथरी के ऑपरेशन में पीठ और पेट के भाग में 12 से 15 से. मी. लम्बा चीरा लगाना पडता है। परन्तु, इस आधुनिक पध्दति में केवल एक से. मी. छोटा चीरा कमर के उपर लगाया जाता है, इसलिए ऑपरेशन के बाद मरीज कुछ दिन में ही अपनी पुरानी दिनचर्या में वापस लौट सकता है।

3. मूत्राशय और मूत्रवाहिनी में उपस्थित पथरी का दूरबीन की मदद से उपचार:

मूत्राशय और मूत्रवाहिनी में स्थित पथरी के उपचार की यह उत्तम पध्दति है। इस पध्दति में ऑपरेशन अथवा चीरा लगाये बिना पेशाब के मार्ग (मूत्रनलिका) से खास प्रकार की दूरबीन (Cystoscope or Ureteroscope) की मदद से पथरी तक पहुँचा जाता है और पथरी को 'शॉकवेव प्रोब' द्वारा छोटे-छोटे कणों में तोड़कर दूर किया जाता है।

4. ऑपरेशन

पथरी जब बड़ी हो और उसे उपरोक्त उपचारों से आसानी से निकालना संभव नहीं हो, तब उसे ऑपरेशन (शल्यक्रिया) द्वारा निकाला जाता है।

दूरबीन द्वारा किये गये उपचार से पथरी को बिना ऑपरेशन निकाला जा सकता है।
पथरी रोकथाम :
क्या एकबार पथरी प्राकृतिक रूप से अथवा उपचार से निकल जाने के बाद इस पथरी की समस्या से सम्पूर्ण रूप से मुक्ति मिल जाती है?

नहीं। एक बार जिस मरीज को पथरी हुई हो, उसे फिर से पथरी होने की संभावना प्रायः 80 प्रतिशत रहती है। इसलिए प्रत्येक मरीज को सजग रहना जरुरी है।

पुनः पथरी न हो इसके लिए मरीज को क्या सावधानियाँ और परहेज रखनी चाहिए?

पथरी की बीमारी में आहार नियमन का विशेष महत्व है। पुनः पथरी नहीं हो, ऐसी इच्छा रखनेवाले मरीजों को हमेंशा के लिए निम्नलिखित सलाहों का पूरी सावधानी से पालन करना चाहिए।

1. अधिक मात्रा में पानी पीना
  • 3 लीटर अथवा 12 से 14 गिलास से अधिक मात्रा में पानी और तरल पदार्थ प्रतिदिन लेना चाहिए।
  • यह पथरी बनने से रोकने के लिए सबसे अधिक महत्वपूर्ण उपाय है।
  • पथरी बनने से रोकने के लिए पीने के पानी की गुणवत्ता से ज्यादा दैनिक पानी की कुल मात्रा ज्यादा महत्वपूर्ण है।
  • पथरी को बनने से रोकने के लिए कितना पानी पिया गया हो इससे भी ज्यादा कितनी मात्रा में पेशाब हुआ है, यह महत्वपूर्ण है। प्रतिदिन दो लिटर से ज्यादा पेशाब हो इतना पानी जरूर पीना चाहिए।
  • पेशाब पुरे दिन पानी जैसा निकले तो इसका मतलब यह है कि पानी पर्याप्त मात्रा में लिया गया है। पिला गाढ़ा पेशाब होना यह बताता है कि पानी कम मात्रा में लिया गया है।
पानी ज्यादा पीना पथरी के उपचार के लिए और उसे फिर से बनने से रोकने के लिए बहुत जरूरी होता है।
  • पानी के अलावा अन्य पेय पदार्थ जैसे कि नारियल का पानी, जौ का पानी, शरबत, पतला मट्ठा, बिना नमकवाला सोडा, लेमन इत्यादि का ज्यादा सेवन करना चाहिए।
  • दिन के किसी खास समय के दौरान पेशाब कम और पिला (गाढ़ा) बनता है। इस समय पेशाब में क्षार कि मात्रा ज्यादा होने से पथरी बनने कि प्रक्रिया बहुत ही जल्द आरंभ हो जाती है, जिसे रोकना बहुत जरुरी है। पथरी बनने से रोकने के लिए बिना भूले
- भोजन करने के बाद तीन घंटे के दौरान, - ज्यादा मेहनत वाला काम करने के तुरंत बाद और - रात्रि सोने से पहले तथा मध्यरात्रि के बीच उठकर दो गिलास या ज्यादा पानी पीना बहुत ही महत्वपूर्ण है।

इस प्रकार दिन के जिस समय में पथरी बनने का खतरा ज्यादा हो उसे वक्त ज्यादा पानी और तरल पदार्थ पीने से पतला, साफ और ज्यादा मात्रा में पेशाब बनता है, जिससे पथरी बनने को रोका जा सकता है।

2. आहार नियंत्रण

पथरी के प्रकार को ध्यान में रखते हुए खाने में पूरी सतर्कता एवं परहेज रखने से पथरी बनने से रोकने में मदद मिलती है।

  • खाने में नमक कम मात्रा में लेना चाहिए और नमकीन, पापड़, अचार जैसे ज्यादा नमकवाले खाघ पदार्थ नहीं खाने चाहिए। पथरी बनने से रोकने के लिए यह बहुत ही महत्वपूर्ण सुचना है। दुर्भाग्य से अधिकांश मरीज इस सुचना के बारे में अनजान होते है।
पर्याप्त मात्रा में पानी लिया जा रहा है इसका सबूत पुरे दिन पानी जैसा साफ पेशाब होना है।
  • नींबू पानी, नारियल पानी, मौसंबी का रस, अन्नानास का रस, गाजर, करैला, बिना बीज के टमाटर, केला, जौ, जई, बादाम इत्यादि का सेवन पथरी बनने से रोकने में मदद करते हैं। इसलिए इन्हें अधिक मात्रा में लेने कि सलाह दी जाती है।
  • पथरी के मरीजों को दुग्ध उत्पादन जैसे उच्च कैल्शियम खाघ पदार्थ खाना नहीं चाहिए - यह धारणा गलत है। खाने में पर्याप्त मात्रा में लिया गया कैल्शियम खाघ पदार्थ के ऑक्ज्लेट के साथ जुड़ जाता है। इससे पेट में आँतों द्वारा ऑक्ज्लेट का शोषण कम हो जाता है और इससे पथरी बनने से रोकने में मदद मिलती है।
  • विटामिन 'सी' ज्यादा मात्रा ( 4 ग्राम या उससे ज्यादा) में नहीं लेना चाहिए।
ऑक्ज्लेटवाली पथरी के लिए परहेज :

नीचे बताए गए ज्यादा ऑक्ज्लेटवाले खाघ पदार्थ कम लेने चाहिए:

  • साग सब्जी में - टमाटर, भिण्डी, बैंगन, सहजन, ककड़ी, पालक, चौलाई इत्यादि।
  • फलों में - चीकू, आवला, स्ट्राबेरी, रसभरी, शरीफा और काजू।
  • पेय में - कडक उबली हुई चाय, अंगूर का जूस, केडबरी, कोको, चोकलेट, थम्सअप, पेप्सी, कोका कोला ।
यूरिक एसिड पथरी के लिए परहेज :

निम्नलिखित खाघ पदार्थ जिससे यूरिक एसिड बढ़ सकता है, कम लेना चहिए।

  • स्वीट ब्रेड, होल ह्वीटब्रेड
  • दलें, मटर, सेम, मसूर की दाल
80 % मरीजों में पथरी फिर से हो सकती है, इसलिए हमेंशा परहेज करना और सुचना अनुसार परीक्षण कराना जरुरी है।
  • सब्जी : फूलगोभी, बैंगन, पालक, मशरूम
  • फल : चीकू, सीताफल, कददू
  • मांसाहार : मांस, मुर्गा, मछली, अंडा
  • बीयर, शराब
1. दवा द्वारा उपचार :
  • जिस मरीज के पेशाब में कैल्शियम की मात्रा ज्यादा होती है, ऐसे मरीजों को थॉयजाइड्स और साइट्रेटवाली दवाइँ दी जाती हैं।
  • यूरिक एसिड की पथरी के लिए एलोप्यूरिनॉल (Allopurinol) और पेशाब को क्षारीय (Alkaline) बनानेवाली दवाओं के सेवन की सलाह दी जाती हैं।
नियमित परीक्षण :
  • पथरी स्वतः निकल जाने अथवा उपचार से निकाले जाने के बाद पुनः होने की आशंका अधिकांश मरीजों में रहती है और कई मरीजों में पथरी होने पर भी पथरी के लक्षणों का आभाव होता है। इसलिए कोई भी तकलीफ नहीं होने पर भी डॉक्टर की सलाह अनुसार या प्रत्येक साल सोनोग्राफी परीक्षण कराना जरुरी है। सोनोग्राफी परीक्षण से पथरी नहीं होने का प्रमाण अथवा पथरी का प्रारंभिक अवस्था में निदान हो सकता है।
पथरी के घटकों को ध्यान में रखते हुए दवाइँ लेने से पथरी के बनने को रोका जा सकता है।
Indian Society of Nephrology
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nkf
kidneyindia
magyar nephrological tarsasag